सनातन धर्म के प्रवर्तक
यह अनादि धर्म नहीं है । यह शास्वत सत्य धर्म है । इसका समय के आधार पर न आदि है न अंत है । जिस धर्म को कोई शुरू करता है उसे उस धर्म का प्रवर्तक कहा जाता है । स्वयं परमात्मा इसके प्रवर्तक हैं | सनातनधर्म सदा चलता ही रहता है लेकिन सनातन धर्म की हानि होने पर परमात्मा इसकी पुनः संस्थापन करते हें | सनातन धर्म भगवत स्वरूप ही है ।