सनातन धर्म मे कई सम्प्रदाय बन गए हैं जो समाज को पथ पर्दर्शित नहीं कर प रहे इएलिए नया पोर्टल लॉन्च किया गया है |
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ 4.7 ॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।। [4.8 ]
सनातन धर्म के पुनः स्थापना के लिए स्वयं परमात्मा प्रकट हुए |